ईश्क की शुरूआत एक बार फिर से हो

Posted by Raqim

इस बार न गलती कोई मेरे यार फिर से हो।
ईश्क की शुरूआत एक बार फिर से हो।।

हमने दुआ माँगी थी हो के ईश्क में रूस्वा।
यारब न कोई मुझ सा शर्मशार फिर से हो।।

नये ईश्क से बेदखल जमाने को करो।
राह में रोड़ा न कोई खार फिर से हो।।

रोये न कोई लैला अब दोबारा ईश्क में।
अब न कोई मजनू संगसार फिर से हो।।

दीवार और सलाखें नये ईश्क में न हों।
आशिक न कोई अब के गिरफ्तार फिर से हो।।

राकिम जमाना ईश्क को कहे है अगर गुनाह।
दो चार फिर से हो सौ हजार फिर से हो।।