हैरत में हैं हैरानियाँ हैं फेर वक्त का

Posted by Raqim

हैरत में हैं हैरानियाँ हैं फेर वक्त का
परीशाँ हैं परेशानियाँ है फेर वक्त का

उम्मीद की उम्मीद नहीं फिर भी देखिये
बदगुमाँ हैं बदगुमानियाँ है फेर वक्त का

मोहताज थे जो एक गमगुसार को कभी
मेहरबाँ हैं मेहरबानियाँ है फेर वक्त का

दाव पेंच अक्लवालों के समझती हैं
नादाँ नहीं नादानियाँ है फेर वक्त का