बहुत कुछ आप अपने को बताना भी जरुरी था

Posted by Raqim

रिवाज-ए-रस्म-ए-तन्हाई निभाना भी जरुरी था
बहुत कुछ आप अपने को बताना भी जरुरी था

समझते हम भी उसको थे समझता वो भी हमको था
मगर इन्कार करने को बहाना भी जरुरी था

यकीनन काम आयेंगे पड़ेगा लौटना जब भी
निशाँ कुछ रुक के राहों में लगाना भी जरुरी था

नहीं मंजूर थी हमको हँसी झूठी कभी लेकिन
गम-ए-दिल को जमाने से छिपाना भी जरुरी था

हथेली जलने का था खौफ हर लम्हा मगर फिर भी
हवाओं से चरागों को बचाना भी जरुरी था

रहे कैसे मेरे रहते कोई इल्जाम आवारा
उसे तो आदतन सर मेरे आना भी जरुरी था

बराबर दोनों थी लाजिम गजल कहना या मजदूरी
कि राकि़म पेट की खातिर कमाना भी जरुरी था