वरना कोई किसी को क्या देगा

Posted by Raqim

सिर्फ उम्मीद है खुदा देगा
वरना कोई किसी को क्या देगा

क्यों शिकायत किसी से क्या करिये
बेवजह ही कोई वजा देगा

आज आमादा डूबने पर हम
आज दरिया भी रास्ता देगा

आखिरश कह दिया है मुंसिफ से
देख लेंगे जो फैसला देगा

ऐसा उतरा है लहू आँखों में
आज आईने को डुबा देगा

टूटते टूटते चराग का दम
कुछ अंधेरों को तो मिटा देगा

Raqim

Posted by Raqim






Raqim

Posted by Raqim



Raqim

Posted by Raqim


Raqim

Posted by Raqim


Raqim

Posted by Raqim


Raqim

Posted by Raqim


Raqim

Posted by Raqim


Raqim

Posted by Raqim


Raqim

Posted by Raqim


जेहन जब गुजरे लम्हों को कभी वापस बुलाता है

Posted by Raqim

जेहन जब गुजरे लम्हों को कभी वापस बुलाता है
सिवा तेरे हमें अक्सर बहुत कुछ भूल जाता है

हमारे हौसलों को देखकर सूरज नें पूछा था
जुगनुओं के लिए लश्कर मुखातिब कौन आता है

बसा ली है निगाहों में उसकी सूरत जबसे हमनें
हमारा चेहरा अब आईना कब हमको दिखाता है

भरे रहते हैं अखबारों के पन्ने इस्तेहारों से
खबर की जगह अब अखबार तो बाजार लाता है

फकीरों की कतारे हैं लकीरों पर खड़ी राकि़म
उसे कहते हैं पागल जो नयी राहें बनाता है

हमारे गम के आलावा नहीं कोई हमारा था

Posted by Raqim

हमारे गम के आलावा नहीं कोई हमारा था
हमें ताल्लुक नें लूटा था हमें रिश्तों ने मारा था

कभी भी आप अपने से नहीं मैं जीत पाया था
शिकायत क्या करुँ किससे कहूँ क्या कैसे हारा था

रिवाज-ए-रस्म-ए-कारोबार हमको कब समझ आये
हमेशा ही हमारे हिस्से में नुकसान सारा था

तुम्हारे हाथ में तलवार थी देखा था हमने भी
चलाने के लिए लेकिन किया किसने ईशारा था

सितारा चमके किस्मत का दुआ क्या माँग ली मैने
गिरा जो मेरे दामन में मेरी किस्मत का तारा था

मयस्सर थी कहाँ हमको यक ब यक मौत भी राकि़म
कातिलों नें जहर रग में कतरा कतरा उतारा था