कमजोर की है जिन्दगी दुश्वार यहाँ पर

Posted by Raqim

हैं लोग जालिमों1 के परस्तार2 यहाँ पर
कमजोर की है जिन्दगी दुश्वार3 यहाँ पर

मशविरा4 है छोड़ दो इंसाफ की उम्मीद
मुंसिफ की शक्ल में हैं गुनहगार यहाँ पर

कुछ यूँ है तजर्बा हमारा इस दयार5 का
कि होता नहीं किसी पे एतबार यहाँ पर

हम हैं बेवकूफ इसका इल्म होते ही
सब के सब हुए हैं होशियार यहाँ पर


कुछ और नहीं है यहाँ तमाशे से सिवा
हैं तरह तरह के किरदार6 यहाँ पर


गैरत7 की बात राकिम यहाँ न कीजिये
है पेट पर सभी के दस्तार8 यहाँ पर


1-आतातायी,अत्याचार करने वाला,2-उपासक,3-कठिन,4-सलाह,5-क्षेत्र,6-पात्र,7-स्वाभिमान,8-पगड़ी

1 comments:

  1. इमरान अंसारी

    सुभानाल्लाह............हर शेर उम्दा और मुक़म्मल...........दाद कबूल करें|