तुम्हारी हमारी कहानी मुकम्मल

Posted by Raqim


तुम्हारी हमारी कहानी मुकम्मल
कहे बिन हुई बेजुबानी मुकम्मल

पता ना चला आते जाते गली में
खर्च हो गई कब जवानी मुकम्मल

मजा मौसमों का जो लेने चले हम
रुत हो चुकी थी सुहानी मुकम्मल

किरदार किस्से के आधे अधूरे
न राजा मुकम्मल न रानी मुकम्मल

बर्दाश्त करने की आदत हमें है
गुजर जाता है सर से पानी मुकम्मल

तमन्ना यही है दोबारा मिलो तुम
हों बातें अधूरी पुरानी मुकम्मल

अदने बहुत हैं सलीके हमारे
हमारी मुसीबत सयानी मुकम्मल

तूफाँ के कद के बराबर नहीं है
राकि़म मेरी बादवानी मुकम्मल



4 comments:

  1. mridula pradhan

    behad khoobsurat andaz.....

  1. Nasimuddin Ansari

    Dhanjay Bhia, Badhiya ..
    Ye bhi likh deta hoon taqee sanad rahe... :)
    मुकम्मल कहानी हमारी तुम्हारी
    जमाना है जाने जवानी जबानी

  1. बेनामी

    khoobsurat

  1. shashi sharma

    khoobsurat