मेरा फेंका हुआ पत्थर मेरे सर लौट आता है

Posted by Raqim


गलत मंसूबा उम्मीदों से दीगर लौट आता है
मेरा फेंका हुआ पत्थर मेरे सर लौट आता है

बहुत अरमान हैं शायद तुम्हारे मिलने से उसको
बिना दस्तक दिये दर से वो अक्सर लौट आता है

निशानी है बड़े होने की रखना खुद को काबू में
हदों से अपनी टकराकर समन्दर लौट आता है


मुआफी का भरम मेरा यकायक टूट जाता है
अचानक जब मेरा कातिल पलटकर लौट आता है

फतह की भी तमन्ना है मगर मुश्किल ये है राकि़म
दिखे मुश्किल अगर कोई तो डरकर लौट आता है

1 comments:

  1. anurag mishra

    बहुत अरमान हैं शायद तुम्हारे मिलने से उसको
    बिना दस्तक दिये दर से वो अक्सर लौट आता है bhai wah Raqim ki jai ho!!!!!!!!