मौला मौला बोल के नाचूँ

Posted by Raqim

मौला मौला बोल के नाचूँ।
गलियों गलियों डोल के नाचूँ।।

मैं हूँ खुदा का मेरा खुदा।
जो मेरा वो तेरा खुदा।।
रिश्ता तेरा-मेरा खुदा।
नाते हैं अनमोल के नाचूँ।।

रंग तोरे रंग जाऊँ अली।
तोरे रंग में नहाऊँ अली।।
खुद में तोहे बसाऊँ अली।
खुद में तोहे घोल के नाचूँ।।

दरिया अल्ला पानी अल्ला।
अल्ला मौज रवानी अल्ला।।
राकिम मेरा जानी अल्ला।
क्योंकर न दिल खोल के नाचूँ।।

1 comments:

  1. Anita

    लगता है यह रचना नाचते नाचते लिखी गयी है जैसे पढते पढते ही कदम थिरकने लगे हैं !